विगत दिनों कोरबा के गरीबों के मसीहा कहे जाने वाले रज्जाक अली की अचानक तबीयत बिगड़ गई। ट्रांसपोर्ट नगर से घर लौटते समय जब वह सोनालिया पुल के पास पहुंचे, तभी उनके सीने में तेज दर्द उठने लगा। स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्होंने तुरंत गाड़ी रोकी और पुराने श्वेता नर्सिंग होम की ओर दौड़ पड़े—बिना यह जाने कि अस्पताल अब बंद हो चुका है।
हालांकि किस्मत ने यहीं से करवट ली। कुछ लोग, जो रज्जाक को पहचानते थे, तुरंत मदद को आगे आए और उन्हें वहीं उपलब्ध एक बिस्तर पर लिटा दिया। रज्जाक ने जैसे-तैसे अपने छोटे भाई को फोन किया, जो कोसाबाड़ी में रहते हैं। भाई तुरंत पहुंचे और उन्हें अपनी गाड़ी से देवनाथ अस्पताल ले गए।
डॉक्टरों ने बताया कि हार्ट अटैक बेहद खतरनाक था, लेकिन वह सही समय पर अस्पताल पहुँच गए, इसलिए उनकी जान बच गई। उपचार के दौरान उनकी स्थिति काफी नाजुक रही, लेकिन गरीबों की दुआ, लोगों की सद्भावना और ईश्वर की कृपा से रज्जाक अली को नया जीवन मिला।
वर्तमान में वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुए हैं और गांव में आराम कर रहे हैं। डॉक्टरों ने उन्हें जल्द से जल्द हैदराबाद जाकर विस्तृत जाँच कराने की सलाह दी है। हमारी फोन पर हुई बातचीत में रज्जाक अली ने कहा—
“मैं एक हफ़्ते के अंदर हैदराबाद जाऊँगा।
जो भी लोग मेरी सेहत के लिए दुआ कर रहे हैं, मैं उन सबका दिल से धन्यवाद करता हूँ।”
कोरबा के लोग आज भी यही कह रहे हैं—
“रज्जाक अली जैसे लोग स्वयं जीते नहीं, दूसरों के लिए जीते हैं… और यही दुआएँ उन्हें वापस इस दुनिया में ले आईं।”


