पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. बंगाल की राजनीति में इस बार सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि भावनाओं, न्याय और जनाक्रोश की भी टक्कर दिख रही है. ममता बनर्जी के मजबूत गढ़ में बीजेपी ने ऐसा दांव चला है, जिसने चुनावी समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है. आरजी कर अस्पताल की पीड़िता ‘अभया’ की मां को टिकट देकर पार्टी ने सीधे जनता के दर्द और गुस्से को चुनावी मंच पर उतार दिया है. यह सिर्फ एक उम्मीदवार नहीं, बल्कि एक प्रतीक बनकर उभरा है. ऐसा प्रतीक जो महिलाओं की सुरक्षा, न्याय की मांग और सिस्टम की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. बंगाल में अब चुनावी जंग और ज्यादा भावनात्मक होती नजर आ रही है

.बीजेपी की तीसरी सूची ने साफ कर दिया है कि पार्टी इस चुनाव को सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि नैरेटिव की लड़ाई बनाना चाहती है. रत्ना देबनाथ का मैदान में उतरना इस बात का संकेत है कि पार्टी जनता के बीच उन मुद्दों को जिंदा रखना चाहती है जो बीते समय में सुर्खियों में रहे. वहीं दूसरी ओर टीएमसी इस फैसले को राजनीतिक अवसरवाद बता रही है. ऐसे में बंगाल की सियासत अब आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संवेदनाओं की जंग बनती दिख रही है.

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