छत्तीसगढ़ में पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति को लेकर जारी देरी अब बड़े विवाद का रूप लेती जा रही है। इस पूरे मामले को लेकर सरकार की मंशा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि लंबे समय से पुलिस विभाग प्रभारी व्यवस्था में चल रहा है, जिससे प्रशासनिक निर्णयों पर भी असर पड़ रहा है। अब तक स्थायी डीजीपी की नियुक्ति नहीं हो पाने को केवल प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, डीजीपी पद के लिए जिन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं, उनमें अरुण देव गौतम, पवन देव, हिमांशु गुप्ता और जीपी सिंह शामिल हैं। वहीं वरिष्ठता सूची में ऊपर होने के बावजूद कुछ अधिकारियों को नजरअंदाज किए जाने की भी चर्चा है।
इस मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सरकार नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता का पालन कर रही है, या फिर किसी विशेष अधिकारी को आगे बढ़ाने के लिए देरी की जा रही है।
प्रशासनिक हलकों में यह भी चिंता जताई जा रही है कि यदि वरिष्ठता और अनुभव को दरकिनार किया गया, तो इससे पुलिस विभाग के मनोबल पर असर पड़ सकता है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार जल्द डीजीपी की नियुक्ति कर इन सवालों का जवाब देती है या फिर यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक विवाद बनता है।

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