कोरबा – राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही छत्तीसगढ़ की दो सीटों पर सियासी हलचल तेज हो गई है। विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से एक सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन असली मुकाबला कांग्रेस के भीतर ही नजर आ रहा है।
🔹 महंत की ‘लॉन्ग इनिंग’ की तैयारी?
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत का नाम सबसे आगे चल रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि लंबे अनुभव और संगठन में पकड़ के चलते पार्टी उन्हें दिल्ली भेज सकती है। यह भी कहा जा रहा है कि महंत खेमे की लॉबिंग तेज हो चुकी है।
🔹 सिंहदेव की किस्मत फिर करवट लेगी?
वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव का नाम भी स्वाभाविक दावेदार के रूप में सामने है। गांधी परिवार से निकटता के बावजूद अब तक मुख्यमंत्री या प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी न मिल पाने की चर्चा अक्सर होती रही है। ऐसे में राज्यसभा उनके लिए ‘सम्मानजनक समायोजन’ का विकल्प माना जा रहा है।
🔹 बैज का समीकरण और संगठन कार्ड
यदि संगठन में फेरबदल होता है तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज भी दावेदारी की कतार में आ सकते हैं। पार्टी में युवा नेतृत्व बनाम अनुभवी चेहरों की बहस के बीच बैज का नाम समीकरण बदल सकता है।
🔹 बघेल फैक्टर और उपचुनाव की अटकल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम भी चर्चा में है, हालांकि उन्हें जननेता के रूप में मैदान की राजनीति ज्यादा रास आती है। लेकिन यदि वे राज्यसभा जाते हैं तो पाटन सीट पर उपचुनाव की स्थिति बन सकती है। ऐसे में उनके बेटे की राजनीतिक एंट्री को लेकर भी सियासी चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं।
🔹 परिवारवाद का नया अध्याय?
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि एक ही परिवार के अलग-अलग सदस्य अलग-अलग सदनों में पहुंचते हैं तो यह प्रदेश की राजनीति में नया उदाहरण होगा। हालांकि यह सब अभी अटकलों के दायरे में है।
भाजपा की रणनीति ‘साइलेंट मोड’ में
विधानसभा में 54 विधायकों के साथ भाजपा की एक सीट लगभग तय है। पार्टी फिलहाल नामों को लेकर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन अंतिम समय में चौंकाने वाला फैसला करने की रणनीति से इनकार नहीं किया जा सकता।
📌 निष्कर्ष
राज्यसभा उपचुनाव भले संख्या के लिहाज से औपचारिक लगे, लेकिन कांग्रेस के भीतर यह प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। अब नजर दिल्ली दरबार के फैसले पर टिकी है — कौन जाएगा राज्यसभा और किसकी सियासी किस्मत बदलेगी?



