ईएसी-पीएम के वर्किंग पेपर में 170 सीटों के पुनर्गठन का सुझाव, 2027 की जनगणना के बाद लागू हो होने की संभावना
नई दिल्ली। देश में लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने एक नया और महत्वपूर्ण मॉडल प्रस्तावित किया है। वर्किंग पेपर के अनुसार वर्तमान 543 लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 824 करने की सिफारिश की गई है। इसका उद्देश्य बढ़ती आबादी के अनुरूप बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना और उत्तर-दक्षिण राज्यों के बीच परिसीमन को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद का संतुलित समाधान निकालना है।
यह रिपोर्ट ईएसी-पीएम की सदस्य डॉ. शमिका रवि और भारतीय सांख्यिकी संस्थान के प्रोफेसर मुदित कपूर ने तैयार की है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि 373 मौजूदा सीटों में कोई बदलाव नहीं किया जाए, जबकि 170 सीटों का पुनर्गठन कर 281 नई सीटें बनाई जाएं।
जनसंख्या ही नहीं, कई मानकों पर होगा परिसीमन
रिपोर्ट के अनुसार सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं होगा। इसमें क्षेत्रफल, शहरीकरण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति की आबादी, भाषाई विविधता, मतदान केंद्रों की उपलब्धता और मतदान प्रतिशत जैसे मानकों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है।
उत्तर-दक्षिण विवाद कम करने की कोशिश
प्रस्तावित मॉडल में दक्षिणी राज्यों की संसद में हिस्सेदारी लगभग यथावत रखने की बात कही गई है। दक्षिण भारत की हिस्सेदारी 23.7% से घटकर 23.6% और उत्तर भारत के प्रमुख राज्यों की हिस्सेदारी 45.6% से घटकर 45.2% रहने का अनुमान है। इससे किसी भी क्षेत्र को बड़ा नुकसान नहीं होगा।
छत्तीसगढ़ में 11 से बढ़कर 17 लोकसभा सीटें
यदि यह मॉडल लागू होता है तो छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटें बढ़कर 17 हो सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार सरगुजा, कांकेर और दुर्ग जैसी बड़ी सीटों का पुनर्गठन कर 6 नए संसदीय क्षेत्र बनाए जा सकते हैं।
इसी प्रकार—
राजस्थान: 25 से 38 सीटें
मध्यप्रदेश: 29 से 44 सीटें
2027 की जनगणना के बाद होगा फैसला
वर्किंग पेपर में सुझाव दिया गया है कि परिसीमन की प्रक्रिया 2027 की जनगणना के अंतिम आंकड़ों के आधार पर की जाए। साथ ही मिजोरम, सिक्किम, लद्दाख, अंडमान-निकोबार, नागालैंड, चंडीगढ़, लक्षद्वीप और पुडुचेरी जैसे छोटे राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की सीटें भी बढ़ाने की सिफारिश की गई है।



